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          जम्मू-कश्मीर के जम्मू शहर से उत्तर-पश्चिम में २६० किमी. दूर पुंछ जिले की मण्डी तहसील के ग्राम राजपुरा स्थित उत्पन्त मनोरम लोरेन धाटी में समुद्र तल से ४६०० फिट की उंचाई पर हिमलिंग स्वरूप बाबा अमरनाथ के प्रकट स्वरूप बाबा बुढा अमरनाथ जी बिराजमान हें | बाबा का  यह विग्रह श्वेत बिल्लौरी (स्फटिक) पत्थर के स्वरूप में प्रकट हें और बाबा बूढा अमरनाथ चट्टानी के नाम से प्रसिद्ध हें | यह स्थान पर्वत-मालाओं की गोद में इठलाती पुल्स्ती नदि के बायें तट स्थित है | यहाँ पारी-पंजाब की बर्फ से लदी चोटियाँ साफ दिख्याई देती  हैं, हर समय शीतल समीर बहती रहती है |
 
          सायंकाल ४.०० बजे के बाद इस मार्ग पर यातायात रोक जाता है और प्रात: ७:०० बजे  तब खुलता है जब सेना का बम निरोधक दस्ता पूरे मार्ग का निरीक्षण कर लेता है | मार्ग पाकिस्तान सीमा से सटा होने के कारण उस पर पाक की नजरे हैं | नौशेरा, राजौरी और पुंछ से भी हिन्दुओं को भगाने का षड्यंत्र चल रहा है | ऐसी कठिन परिस्थिति में यह यात्रा लगभग समाप्त सी हो गयी थी | आज भी सम्पूर्ण क्षेत्र में आंतकवाद चरम पर है | नित नई घटनाएं होती रहती है | पुंछ, राजौरी का हिन्दू ३२ दांतों के बिच जीभ के समान रह है | उसका मनोबल टूट रहा है सरकारों से निराशा ही हाथ लगी है उसकी नजर देश के हिन्दू समाज पर है वह चाहता है देश का सम्पूर्ण हिन्दू समाज इस लड़ाई में उसके साथ खड़ा हो |

क्या आप जानते है?

हमारे ६२ जिले और २९५ धर्मस्थल पाकिस्थान एवं बंगलादेश कि इस्लामिक कैद में है |

शेष हिंदुस्तान पर कब्जा करने कि उसकी नियत है|
 
यात्रा आयोजन का उदेश्य
          वैसे तो हजारों वर्षों से कश्मीर घाटी में चली आ रही पवित्र श्री अमरनाथ यात्रा कि ही भांति पुंछ मण्डी स्थित  बाबा बुढा अमरनाथ कि यात्रा भी परम्परागत रूप से सावन मास से होती थी और मान्यता भी यही है कि बुढा अमरनाथ कि यात्रा किये बिना बाबा अमरनाथ कि यात्रा पूर्ण नही मणि जाती | किन्तु सम्पूर्ण क्षेत्र में चले आ रहे आतंकियों के कहर में इस राष्ट्रीय यात्रा को तहसील और जिले तक ही सिमित करलिया और कुल समय सीमा भी दो-तिन दिन तक ही सिमट गई | इस यात्रा को पुनर्प्रतिष्ठित करने का दायित्व राष्ट्रभक्त हिन्दू समाज का है | क्योकि पहले ही बंटवारे के समय कश्मीर एवं जम्मू के बहुत बढे भू-भाग पर पाकिस्थान ने और १९९२ में चीन ने कब्जा कर रखा है और लगातार आतंकी हमलों के कारण कश्मीर घाटी हिन्दूओ से खाली हो गई | अब योजना बचे हुए जम्मू को खाली कराने कि है | आज राजोरी में ३५ प्रतिशत और पुंछ में हिन्दू सिख बचे है | नौशेरा, राजौरी, पुंछ के हिन्दू कि सुध लेंने उनका मनोबल बढाने के लिए इस यात्रा को पुनर्प्रतिष्ठित करने का राष्ट्रीय उदेश्य है हमारा ताकि पलायन रुक सके | क्या हमने कभी सोचा कि हम मंदिरों में दर्शन-पूजन करते रहे उसके बाद भी एक-एक करके हमारे लाखो धर्मस्थल तोड़ दिऐ गए या फिर उन धर्मस्थलो कि सुध लेने वाला हिन्दू ही वहां नही रहा और वे स्वयं ही नष्ट हो गए आखिर क्यों?
 
          हम अपने धर्म को पूजा-पाठ एवं कर्मकांड के प्रति आस्थाओ तक ही समेटे न रहे | धार्मिक आश्था के साथ-साथ राष्ट्रिय निष्ठां का जागरण एवं राष्ट्ररक्षा का संकल्प भी धार्मिक आयोजनों एम यात्राओ में से प्रकट हो, पृष्ट-हो जैशे १९९६ में समाप्त प्राय हो रही बाबा अमरनाथ कि यात्रा को इस देश कि नौजवानी ने अपना बलिदान देकर पुनर्प्रतिष्ठित किया | इतियास साक्षी है कि उस प्रयत्न के कारण उनके कठिन परिस्थितीया और आतंकी हमलों के बावजूद भी लाखो लोगो बाबा अमरनाथ के दर्शन करने जा रहे है | ठीक उसी तरह वर्ष २००५ में बाबा बूढा अमरनाथ कि यात्रा का संकल्प लिया गया | इस वर्ष वह पांचवा चरण है | वर्ष २००६ में अमरनाथ भूमि संघर्ष के कारण शासन ने यात्रा रोक दी | हिन्दू समाज के साहस और संघर्ष ने अमरनाथ भूमि आंदोलन में राष्ट्रद्रोहियों और उनके संरक्षक राजनेताओ को झुकने के लिए विवश क्र दिया | ऐसी परिस्थिती में २००६ कि बाबा बुढा अमरनाथ कि यात्रा को और अधिक सफल बनाकर हम राष्ट्र विरोधियो के मंसूबों को विफल कर सकते है | जो नही चाहते हे कि जम्मू-कश्मीर भारत का अंग बना रहे | आइये चुनोती स्वीकारे | इस पवित्र अभियान में सहयोग तो दे ही एम बाबा बुढा अमरनाथ के दर्शन कर पुणय प्राप्त करे|
 

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